जानिए डी डी फ्रीडिश में नए चैनल्स क्यों नहीं जोड़े जा रहे?

जानिए डी डी फ्रीडिश में नए चैनल्स क्यों नहीं जोड़े जा रहे?

जानिए डी डी फ्रीडिश में नए चैनल्स क्यों नहीं जोड़े जा रहे?

आज हम आपको ऐसा अपडेट दे रहे है जिसके बारे में हर उस व्यक्ति को जानना जरुरी है जो फ्रीडिश इस्तेमाल कर रह है. क्युकी आज 99% फ्रीडिश के उपयोगकर्ता सरकार को उल्टा सीधा बोल रहे है. कह रहे है की सरकार ने नए चैनल्स को जोड़ने पर रोक लगा रखी है, धार्मिक चैनल्स हटा दिये है आदि आदि.

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तो आज हम विभिन्न मीडिया स्रोतों से ये पता करने की कोशिश करेंगे की आखिर चल क्या रहा है?

October 2017:

शुरुआत हम अक्टूबर 2017 से करते है क्युकी तभी से दूरदर्शन फ्री डिश की स्लॉट की नीलामी पर रोक लगी हुयी है. अतिम डी डी फ्रीडिश स्लॉट की नीलमी जुलाई 2017 महीने में हुयी थी.

इस खबर को exchange4media.com ने प्रमुखता से अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया था की दूरदर्शन फ्रीडिश में प्राइवेट चैनल्स की संख्या अधिक होने से दूरदर्शन के जो अपने चैनल्स है उनकी विज्ञापन राजस्व में भारी कमी आई है.

और इस खबर को livemint.com ने भी प्रमुखता से अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया और बताया की “दूरदर्शन के विज्ञापन से होने वाले राजस्व में भारी कमी आई है, सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती ने अपने परिचालन घाटे को इस साल दोगुना कर दिया। ब्रॉडकास्टर ने 2015-15 में 200 करोड़ रुपये की तुलना में 2015-16 में लगभग 400 करोड़ रुपये का परिचालन घाटा दर्ज किया।“

November 2017:

इस तरह की खबरों को देखते हुए सरकार (information and broadcasting (I&B) ministry) ने प्रसार भारती / दूरदर्शन से नवम्बर 2017 में एक नोटिस जारी कर डी डी फ्रीडिश की पालिसी पर शुरू से विचार करने को कहा और इसके रेवेन्यु मॉडल की जानकारी देने को कहा. क्युकी जैसा की आप जानते है की डी डी फ्रीडिश की शुरुआत 16 December 2004 में हुयी थी और तब से शायद इसकी राजस्व पालिसी में सुधार नहीं किया गया होगा.

20 April 2018:

उसके बाद economictimes में 20 अप्रैल 2018 को छपी खबर के अनुसार “ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने डी डी फ्रीडिश ब्रॉडकास्टर से यह भी बताने के लिए कहा गया है कि वह अपने फ्री डिश कार्यक्रम की समीक्षा क्यों नहीं कर रहा था, क्युकी इस कार्यक्रम में केवल निजी चैनलों को लाभान्वित किया और सरकार या देश को होने वाले नुकसान को अनदेखा किया गया.” economictimes के अनुसार डी डी फ्रीडिश ब्रॉडकास्टर ने आठ में से एक भी लैटर / नोटिस का जवाब नहीं दिया जो नवम्बर 2017 से मंत्रालय द्वारा जारी किया गए. एक वरिष्ठ मंत्रालय के एक अधिकारी ने दृढ़ता से लिखे पत्र में कहा कि डीडी फ्री डिश 6-8 करोड़ रुपये के रूप में चैनल जोड़ रहा था जो बहुत ही कम है, जिसमें प्रति चैनल लागत शामिल नहीं थी और वही प्रसार भारती के अनुमानों के मुताबिक 250 करोड़ रुपये प्रति चैनल का खर्चा आता है.

पत्र में ये भी कहा गया की, नवंबर 2003 में एक पत्र के माध्यम से I&B मंत्रालय ने टीवी कवरेज के विस्तार पर मंजूरी देकर कहा था कि यह योजना टिकाऊ, प्रदर्शनशील और सरकार पर विना बोझ के साथ लागू करनी चाहिए।” मंत्रालय ने कहा है कि डीडी फ्री डिश निजी चैनलों को अत्यधिक सब्सिडी दे रहा था, जो कई वर्षों से चल रहे थे।

सरकार ने प्रसार भारती को याद दिलाया की जिन चैनल्स को आपने 6 – 8 करोड़ रुपये में डी डी फ्रीडिश में जोड़ा है वो साल में 500-800 करोड़ तक की कमाई कर रहे है फिर ये चैनल्स कैसे इतनी बड़ी सब्सिडी के हक़दार है. जबकि दूरदर्शन के खुद के अपने भी 23 चैनल्स है जिनका खर्चा 8333.00 करोड़ रुपये या पर चैनल अनुमानित खर्चा 360 रुपये करोड़ का है.
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा की “मंत्रालय केवल राजकोष के पैसे (घाटे) के बारे में चिंतित है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगर फ्रीडिश चैनलों को आवंटित करने में राजस्व साझा (revenue sharing) करने की व्यवस्था लागू की जाये तो आने वाले वर्षों में डीडी उच्च राशि अर्जित कर सकता है ”

14-May 2018

business-standard.com ने आज बताया की प्रसार भारती बोर्ड ने आज यहां एक बैठक में निर्णय लिया की प्रसार भारती डीडी फ्री डिश को रोकने के फायदे और नुक्सान के बारे में मंत्रालय को अवगत कराएगी

 

 

 

 

(यह लेख सचिन (ब्लॉगर) के द्वारा भेजा गया है, अगर आप भी गेस्ट पोस्टिंग (Guest Blogging) कर अपने विचार व्यक्त चाहते है तो यहाँ क्लिक करे)

कृपया ध्यान दे: ये सारे अपडेट विभिन्न आदरणीय मीडिया स्रोतों से लिए गये है, और उन्हें hindi में आपके लिए ट्रांसलेट किया गया, ट्रांसलेशन के दौरान वाक्यों एवं शव्दों में त्रुटी हो सकती है, इसलिए मीडिया स्रोतों को जरुर चेक कर ले. इसमें ब्लॉगर (सचिन) की कोई जिम्मेदारी नहीं है. इसे आधिकारिक न्यूज़ के रूप में न देखे.

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